सब्जपोश मस्जिद में रोज़ा व ज़कात के मसाइल पर डाली गई रोशनी
अगर आप मालिके निसाब हैं तो ज़कात जरूर अदा करें : मुफ्ती अख्तर
गोरखपुर। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में महाना दीनी महफ़िल हुई। जिसमें रोज़ा व ज़कात के मसाइल पर रोशनी डाली गई। माह-ए-रमज़ान के इस्तकबाल का तरीका बताया गया।
मुख्य वक्ता मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि रोज़ा रखना सिर्फ भूखे रहना ही नहीं है, बल्कि उन हजारों-लाखों गरीबों की भूख का एहसास करना है जो भूखे रहने को मजबूर हैं। इस तरह रोज़ा सिर्फ पेट का नहीं, मुंह, कान, हाथ, पैर सभी अंगों का होता है। बुरी बात न कहना, चुगली न सुनना, गलत रास्ते पर न चलना और बुरों का साथ न देना भी रोज़े का ही हिस्सा है। रोज़ा परहेजगार बनाने के लिए आता हैं। रमज़ान का महीना हमारी ट्रेनिंग के लिए आ रहा है ताकि हम साल के अन्य महीनों में अल्लाह के फरमाबरदार बनकर ज़िंदगी गुजारें। माह-ए-रमज़ान का रोज़ा परहेजगारी पैदा करने का बेहतरीन जरिया है। मुसलमान सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए साल मे एक महीना अपने खाने-पीने, सोने-जागने के समय में तब्दीली करता है। वह भूखा होता है लेकिन खाने-पीने की चीजों की तरफ नज़र उठा कर नहीं देखता है। रमज़ान सब्र के इम्तिहान का खास महीना है। रोज़ा रखने से दूसरों की भूख-प्यास का अहसास होता हैं। अन्न की कद्र व कीमत भी समझ में आती हैं। रमज़ान में अल्लाह ने बंदों की रहनुमाई के लिए अपनी पाक किताब कुरआन शरीफ़ उतारी। इस महीने मे नफ्ल नमाज़ अदा करने पर अल्लाह फ़र्ज़ नमाज़ अदा करने के बराबर सवाब और फ़र्ज़ नमाज़ अदा करने पर सत्तर फ़र्ज़ नमाज़ों के बराबर सवाब अता करता है। इस माह कसरत से जकात, सदका व फित्रा निकालना चाहिए ताकि गरीब, यतीम बेसहारा सभी रमज़ान व ईद की खुशियों में शामिल हों सकें। अगर किसी शख्स ने एक रोज़ेदार को इफ्तार कराया तो उस शख़्स को भी उस रोज़ेदार के बराबर सवाब मिलेगा। भले ही उसने एक घूंट पानी से ही रोज़ेदार का रोज़ा खुलवाया हो। रोज़ेदार के लिए दरिया की मछलियां दुआ करती हैं। रोज़ेदार के मुंह की बू अल्लाह को मुश्क से ज्यादा पसंद हैं। रोज़ेदार जन्नत में एक खास दरवाज़े से दाखिल होगा।
उन्होंने कहा कि अगर आप मालिके निसाब हैं, तो हक़दार को ज़कात ज़रूर दें, क्योंकि ज़कात न देने पर सख़्त अज़ाब का बयान कुरआन शरीफ़ में आया है। ज़कात हलाल और जायज़ तरीक़े से कमाए हुए माल में से दी जाए। अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान की दुआ मांगी गई। महफ़िल में हाफिज रहमत अली निजामी, हाफिज सैफ रज़ा, मो. आसिफ, मो. इरफ़ान, शहनवाज, हसन अली, हाजी बदरुल, मो. रूशान आदि मौजूद रहे।
