कुर्बानी करना वाजिब है : मुफ्ती मेराज
गोरखपुर। मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में दर्स (व्याख्यान) हुआ। जिसमें मस्जिद के इमाम मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि कुर्बानी करने का हुक्म क़ुरआन-ए-पाक में दिया हुआ है। कुर्बानी करना वाजिब है। कुर्बानी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। जो इस उम्मत के लिए बरकरार रखी गई है और पैगंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इसका हुक्म दिया गया है। इस पर्व में हर वह मुसलमान जो आकिल, बालिग, मुकीम, मर्द, औरत जो कुर्बानी के तीनों दिन के अंदर जरुरते अस्लिया को छोड़कर, कर्ज से फारिग होकर तकरीबन 45 हजार रुपये का मालिक हो जाए तो उसके ऊपर कुर्बानी वाजिब है। इसी वजह से हर मुसलमान इस दिन कुर्बानी करवाता है।
कुर्बानी के जानवर में ऐब नहीं होना चाहिए : मुफ्ती अजहर
वहीं चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में दर्स (व्याख्यान) के दौरान नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि कुर्बानी के जानवर को ऐब (दोष) से खाली होना चाहिए। अगर थोड़ा से ऐब हो तो कुर्बानी हो जाएगी मगर मकरुह होगी और ज्यादा हो तो कुर्बानी होगी ही नहीं। अंधे जानवर की कुर्बानी जायज़ नहीं इतना कमजोर जिसकी हड्डियां नजर आती हों और लंगड़ा जो कुर्बानीगाह तक अपने पांव से जा न सके और इतना बीमार जिसकी बीमारी जाहिर हो जिसके कान या दुम तिहाई से ज्यादा कटे हों इन सब की कुर्बानी जायज़ नहीं। साफ-सफाई का सभी खास ख्याल रखें।
मौलाना महमूद रज़ा कादरी ने बताया कि कुर्बानी में भेड़, बकरी, दुंबा सिर्फ एक आदमी की तरफ से एक जानवर होना चाहिए और भैंस में सात आदमी शिरकत कर सकते हैं। कुर्बानी के लिए भैंस दो साल, बकरा-बकरी एक साल का होना चाहिए। कुर्बानी और अकीका की शिरकत हो सकती है।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर अमनो अमान की दुआ मांगी गई। दर्स में मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी, हाफिज नजरे आलम कादरी, हाफिज शारिक, नवाज अहमद, हाफिज सैफ रज़ा इस्माईली, शमशीर अहमद, फुजैल अहमद, मुन्ना अली, यासीन अहमद आदि ने शिरकत की।


