माहे मुहर्रम में कर्बला के शहीदों को याद करते हुए करें नेक काम: वरिष्ठ समाजसेवी आदिल अमीन
गोरखपुर। मुहर्रम की दस तारीख को पैग़म्बरे आज़म हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत सैयदना इमाम हुसैन रदियल्लाहु अन्हु व उनके साथियों को दहशतगर्दों ने बेरहमी के साथ तीन दिन का भूखा प्यासा कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान में शहीद कर दिया था। इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हुए नेक काम करें। माहे मुहर्रम 7 या 8 जुलाई से शुरू हो रहा है। माहे मुहर्रम से ही नया इस्लामी साल शुरू होता है। माहे मुहर्रम के आगाज से 1446 हिजरी शुरू हो जाएगी। प्रशासन का सहयोग करते हुए रवायत के मुताबिक जुलूस निकालें। हर हाल में आपसी भाईचारा व अमनो अमान कायम रखा जाए।
यह बातें जिला शांति एवं सद्भावना समिति के सदस्य व वरिष्ठ समाजसेवी समाज कल्याण सदस्य एससी एसटी आदिल अमीन ने एक प्रेस रिलीज के जरिए कही।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम इबादत का महीना है। हजरत सैयदना इमाम हुसैन व उनके ज़ाबाज़ साथियों की कुर्बानी की याद में पौधा रोपण कार्यक्रम करें। गरीबों व जरूरतमंदों को खाना खिलाएं। मस्जिदों व घरों में ‘जिक्रे शोह-दाए-कर्बला’ महफिल/मजलिस करें। इबादत करें। कुरआन ख्वानी व फातिहा ख्वानी करें। दरूदो सलाम पेश करें। दुआओं का विर्द करें। नौवीं, दसवीं व ग्यारहवीं मुहर्रम की तारीख को रोजा रखें। जरूरतमंद व गरीब बच्चों को पढ़ने लिखने का सामान मुहैया करवाएं। लंगर-ए-हुसैन और पानी/शर्बत का स्टॉल लगाएं। रक्तदान करें। जरूरतमंद मरीजों का इलाज करा दें। मरीजों व गरीबों में फल वितरण करें। अमनो शांति कायम रखने में प्रशासन की हरसंभव मदद करें।
