गोरखपुर महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को दूसरे दिन अभियान थिएटर ग्रुप के द्वारा स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित नाटक विवेकानंद कॉलिंग: शिकागो लाइव का मंचन तारामंडल स्थित योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में किया गया। श्रीनारायण पाण्डेय द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस नाटक का मंचन विगत कई वर्षों से 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर गोरखपुर महोत्सव में प्रतिवर्ष होता रहा है। नाटक में भारत को वैश्विक पटल पर गौरवान्वित करने वाले स्वामी विवेकानंद की जीवन की समस्त यात्राओं व घटनाओं को बेहद ही सुगमता से मंच पर जीवंत किया गया। विवेकानंद के बाल्यकाल से लेकर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस से भेंट और उनके बीच सम्बन्ध और फिर अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से विश्व कल्याण की प्रेरणा पाकर उनके विचारों और उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से देश भ्रमण के दौरान की कई कहानियों और शिकागो विश्व धर्म संसद में उनके भाषण के दृश्यों को देखकर दर्शकों के मन में नाटक ने राष्ट्रभक्ति की चेतना को जागृत किया। स्वामी विवेकानन्द जी ने किस प्रकार भारतीय सभ्यता और संस्कृति, भारतीय दर्शन, भारतीय आध्यात्मिक संपदा तथा भारत के सनातन परंपरा का पश्चिमी देशों में प्रचार प्रसार किया और पूरे विश्व को मानवता का पाठ पढ़ाकर वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश दिया नाटक में भलीभांति प्रदर्शित किया गया। नाटक के कथानक के माध्यम से छुआछूत, संप्रदायवाद, धर्मांधता और धर्मांतरण, कट्टरता, लिंग भेद, अंधविश्वास तथा रूढ़ियों जैसे कई सामाजिक समस्याओं पर कुठाराघात करते हुए सहिष्णुता, विश्व शांति, मानवीय मूल्यों को बढ़ावा, समानता, नारी शिक्षा पर बल, और आधुनिक विज्ञान को स्वीकार करते हुए तथा भारतीय आध्यात्मिक आदर्श को सुरक्षित रखते हुए किस प्रकार धर्म और विज्ञान के समन्वय से सुंदर तथा सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है, विवेकानंद जी के प्रगतिशील विचारों और आदर्शों को सभागार में उपस्थित युवाओं में संदेश को प्रवाह किया गया। मंच पर स्वामी विवेकानंद की भूमिका में आदर्श मिश्रा, रामकृष्ण परमहंस सुमितेन्द्र कुमार, सूत्रधार गर्विता राय, खेतड़ी नरेश मनीष यादव, अलवर नरेश राहुल सिंह कुशवाहा, आदित्य, अमित सोलंकी, वैदेही शरण, रितिका गुप्ता, सत्यम मिश्रा, रवि कुमार कुशवाहा, श्रेया चंद, संजना निषाद, विशाल गुप्ता, राहुल विश्वकर्मा, ऋषभ चंद, कनक कुमारी, कलश कुमारी आदि का अभिनय सराहनीय रहा।
मंच परे में प्रकाश परिकल्पना राहुल सिंह कुशवाहा, विशाल गुप्ता, संगीत परिकल्पना मनीष यादव, सुमितेन्द्र कुमार, मेकअप – सुमितेन्द्र कुमार, कनक कुमारी, कलश कुमारी, आदर्श मिश्रा, वस्त्र विन्यास गर्विता राय, रितिका गुप्ता, सेट एंड प्रॉपर्टी में बैदेही शरण, रवि कुमार कुशवाहा, अमित सोलंकी, स्टेज मैनेजर बैदेही शरण, सह निर्देशन – सुमितेन्द्र कुमार, लेखन, परिकल्पना एवं निर्देशन श्रीनारायण पाण्डेय का रहा। दूसरी नाट्य प्रस्तुति कबीर: क्रांति का शंखनाद कथा सार कुछ इस प्रकार है कबीर (क्रांति का शंखनाद), सम्पूर्ण मानव जाति को एकता की माला में पिरोने वाला वह धागा है जो सदैव समसामयिक और प्रासंगिक है। कबीर का शाब्दिक अर्थ महान है और कबीर अपने नाम से ही नहीं बल्कि अपने विचारों एवं कर्मों से भी सदैव सम्पूर्ण विश्व को जाति एवं धर्म के नाम पर फैले आडम्बर से लोगों को मुक्त करते हुए अपनी महानता का परिचय देते हैं।
पाठकों, आलोचकों एवं अनुयाइयों के लिए कबीर सबके अलग – अलग कबीर हैं। अतः कबीर एवं उनका जीवन लोगों की दृष्टि में एक रहस्य सा लगता है। इनके जन्म को लेकर उनके जीवन से जुड़े कुछ पात्र जैसे लोई, कमाल, कमाली के सम्बन्ध में अनेक मत-मतान्तर है। हमारा उद्देश्य उनसे संबंधित तर्कों में न उलझकर आज के जन जीवन और जन-मानस में व्याप्त विषमताओं, जैसे जातीयता, साम्प्रदायिकता एवं व्यक्तिगत द्वेष, ईष्या जैसी कुरीतियाँ, जिनके विरुद्ध कबीर आजीवन संघर्षरत रहे, उसे दिखाने का एक प्रयास मात्र है।
पात्र परिचय कबीर की मुख्य भूमिका एवं परिकल्पना व निर्देशन – मानवेन्द्र त्रिपाठी,रैदास – शिवा श्रीवास्तव, नीरू – रवींद्र रंगधर,नीमा – रितिका सिंह ,बादशाह – संजय मिश्रा,कोतवाल – नन्दाराम चौधरी,मौलवी – उमाशंकर मिश्रा,महंत & कायस्थ – चन्द्र प्रकाश शर्मा ,बदरू – संजय मिश्रा ,पंडित&गुरु&सैनिक1 – प्रियांशु,सेना – हर्षित,बशीरा – अभिषेक ,सैनिक 2 & ग्रामीण – अरुण,ग्रामीण – मोनी, पल्लवी,दिव्या, सागर, अनिल, पंकज, उत्तम,अविनाश, अतुल,मंच परे
रूप सज्जा – राधेश्याम,वस्त्र विन्यास -अखिलेश कुमार,मंच सज्जा – पंकज कुमार,प्रॉपर्टी संकलन – सागर, पल्लवी,रंगदीपन – ऋषभ दास,पार्श्व संगीत व स्वर – पिंटू प्रीतम एवं साथी
पार्श्व ध्वनि स्पेशल इफेक्ट्स – दुर्गेश कुमार ,पार्श्व नरेशन – प्रमोद सिंह,प्रोडक्शन मैनेजर – राज मौर्या,सह निर्देशन – आकांक्षा विक्ट्री,प्रस्तुति – रवि शंकर खरे ।


